वास्तव में राम भक्त शबरी कौन थी, क्या आप जानते है
हमारे भारत देश में ऐसे बहुत से लोग है जिन्होंने रामायण जरूर बढ़ी होगी। बता दे कि आज हम यहाँ किसी और की नहीं बल्कि राम भक्त शबरी की बात करने वाले है। जी हां वास्तव में राम भक्त शबरी कौन थी, क्या आप जानते है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि शबरी का असली नाम श्रमणा था। दरअसल वह अपने बचपन से ही राम जी की काफी बड़ी भक्त थी। हालांकि विवाह के बाद शबरी को एक ऐसा पति मिला जो न केवल उस पर अत्याचार करता था, बल्कि गलत काम भी करता था। ऐसे में शबरी को अपने पति के साथ रहना मंजूर नहीं था। जिसके कारण वह मौका पा कर मतंग ऋषि के आश्रम में रहने के लिए घर से भाग गई। गौरतलब है कि शबरी एक अछूत थी। जिसके कारण वह आश्रम के बाहर ही बैठ गई।

राम भक्त शबरी कौन थी..
मगर बाद में मतंग ऋषि जी ने उसे आश्रम में रहने की अनुमति दे दी। बता दे कि शबरी दिन रात राम भक्ति में लीन रहती थी। यहाँ तक कि अपने अच्छे व्यव्हार के कारण उसने सब का दिल भी जीत लिया था। हालांकि जब उसके पति को यह पता चला कि वह आश्रम में है, तो उसका पति आश्रम तक पहुँच गया। मगर ऋषि ये बात जानते थे कि शबरी अपने पति के साथ नहीं जाना चाहती। जिसके चलते उन्होंने अपने तपोबल से ऐसी अग्नि उत्पन्न कर दी जिससे उसका पति आश्रम के अंदर प्रवेश न कर सके। इसके बाद शबरी का पति खुद ही आश्रम के बाहर से चला गया। वैसे आप सब को याद ही होगा कि वनवास के दौरान श्री राम और लक्ष्मण जी सीता माता की खोज करते हुए मतंग ऋषि के आश्रम में पहुँच गए थे।
बता दे कि मतंग ऋषि ने न केवल दोनों का सत्कार किया, बल्कि शबरी को भी भगवान् राम से मिलवाया। जब शबरी को पता चला कि भगवान् राम खुद आश्रम में आएं है, तो शबरी भाग कर राम जी से मिलने चली गई। यहाँ तक कि वह राम जी और लक्ष्मण जी के लिए कंद मूल यानि बेर भी लेकर आई। हालांकि उसे इस बात का डर था कि कही राम जी के बेर खट्टे न निकले। जिसके चलते सबसे पहले वह बेर को खुद चखती थी और फिर राम जी को देती थी। वही दूसरी तरफ शबरी का सरल व्यव्हार देख कर राम जी भी बेहद प्रसन्न हुए।
वैसे शबरी का उद्धार उसी समय हो गया जब राम जी ने उसके झूठे बेर खाएं थे। अब इसे पढ़ने के बाद आपको ये तो समझ आ ही गया होगा कि वास्तव में राम भक्त शबरी कौन थी और राम जी ने उसके झूठे बेर क्यों खाएं थे।
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hello everyone, my name is Rajni Goyal. i am a writer but on the other side i love music. to be very frank i also even don’t know what i want to do in my life. लेकिन अगर अपनी भाषा मैं कहूं तो…. भटकती हुई मुसाफिर हूँ, मंजिल की तलाश है, जहाँ मंजिल दिख जाएँ वही लिखा हमारी किस्मत का असली आगाज है।



